Submission 1580

आशा

Submitted By: Agyaan

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अंधेरों की स्याही में भी, एक दीपक जलता है, टूटे हुए सपनों में भी, कोई आकाश पलता है। हर आँसू समंदर बनकर, इंसान को गढ़ता है, हर गिरावट की छाया से, नया रास्ता निकलता है। ज़मीन चाहे चुप रहे, पर जड़ों में स्वर रहते हैं, खामोशी के जंगल में भी, गीतों के घर रहते हैं। मत पूछो जीवन का मोल, ये तौल से परे होता है, एक मुस्कान से दुनिया का, इतिहास लिखे होता है। अगर ढह जाएं सब सहारे, तो सब्र का सहारा लो, गिरते हुए सितारों से भी, नई सुबह का इशारा लो।

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Reg ID: HF25-5052

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