कलम और कविता
Submitted By: Keshav N
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क़लम और कविता के बीच का पुल मज़बूत ही होगा क्या? दिल और दिमाग का बोझ लिए कवि, जब रोज़ चलेगा, पुल उसे झेल भी पाएगा? बचपन और पीरी की धुंध में खोया कवि, कविता तक पहुँच भी पाएगा? प्यार और नफ़रत के जूते को हाथोन में लिए कवि, उन्हें उस पार तक पहन भी पाएगा क्या? ज़हर को स्याही बनाकर कवि, कविता तक उसे पहुंचा भी पाएगा? क़लम और कविता के पुल को कवि, फाँद भी पाएगा?
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Reg ID: HF25-5289
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