Submission 2492

अनकही बाते

Submitted By: Anjali Parmar

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मेरे दिल के कोने में छुपा दर्द बड़ा गहरा बोल नहीं पाती ये अनकही जज्बात का सिलसिला आँखों में छुपी हुई बरसो की कहानी, जिस से पूरी दुनिया है अंजानी थक कर पूरी दुनिया से कमरे में अकेले बैठी हूं कोई नहीं सुनने वाला इसलिए चार दीवारों से बात करती हूं देखते हुए कमरे की छत को बस करती हूँ केवल एक सवाल , क्या दुनिया अपनाएगी मुझे ,देखकर मेरा असली हाल? कभी तो खुलेंगे बंद पलको के परदे जहां से झरेगा मेरे दर्द का सागर इंतज़ार है उस पल का, जब आएगा कोई, जो सुलझाए मेरी अनकही बातों का सिलसिला

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Reg ID: HF25-5344

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