Submission 2655

वह भी क्या दिन थे

Submitted By: Mohit Jain

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वह भी क्या दिन थे जब हम मजे करते थे, स्कूल जाकर दूसरों का खाना खाते थे। परीक्षा शुरू होने पर लगता मानो हम हैं बंदी, परीक्षा खत्म होने पर मिल जाती हमें आज़ादी। आठवीं कक्षा में इतना खेला कि आ गया मज़ा, लेकिन मिलने वाली थी हमें कोरोना की महा सज़ा। घर में बंद हुई दुनिया सारी, लॉकडाउन रहा दसवीं कक्षा तक जारी। दोस्तों से बहुत बातें करते लेकिन वो भी लगती कम, ऐसा लगता मानो पुराने दिनों में लौट आए हैं हम। फिर निकट आए बोर्ड, हो गया हम पर पढ़ाई का बोझ। बस ऐसे ही हम मुश्किलों का सामना करते रहे, ज़िंदगी में बिना रुके हम आगे बढ़ते रहे।

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Reg ID: HF25-5405

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