तुम्हारी नाराज़गी
Submitted By: Supreet P hadagali
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कैसे कहूँ कितनी शिद्दत से तुमसे प्यार किया है, तुम्हीं से मोहब्बत, तुम्हीं से ऐतबार किया है। सौ साल मैं जियूँ या तुम, पर जब तक रहूँगा तब तक तुम्हें याद करूँगा। तुम मुझसे नफ़रत न करना, बस इस बात से डरूँगा। तुम्हारी आँखों में जो प्यार देखा है मैंने, उसे इस ज़ुबान से बयां करना भी नहीं आता। और उन्हीं आँखों में आँसू? और वो भी मेरी वजह से? मुझे वो देखना भी नहीं आता। तुम रूठो और मैं लाख मनाऊँ — ऐसा कब हुआ है, पर मैं रूठूँ और तुम मनाओ — ऐसा हर बार हुआ है। यही खूबसूरती है तुम्हारे प्यार की, ये बताना भी नहीं आता।
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Reg ID: HF25-5064
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