यादें और वादे
Submitted By: Mangala Kalavakuri
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क्या सोचा, क्या हुआ, जिंदगी हाल- बेहाल हुआ। बचपन की वो खट्टी-मीठी यादें, पल - पल मुझे सताती है। मेरी माँ का आँचल मुझे बहुत याद आता है, बहुत ही रुलाता है। चलते चलते पैरोंमें दर्द को देखकर पिता का मुझे अपने कंधोपर उठाना प्यार से पुचकारना "मेरी प्यारी बेटी" कहना। बचपन में भाई-बहनोंसे मजाक-मस्ती, तो कभी मार भी खाना रोना-फिर-सबकुछ भूल के हंस देना। पिया के घर आकर भी कभी- भी भूली नही मायका पति को परमेश्वर और बच्चों को बुढापे का आधार माना। उफ ! लेकिन परमेश्वर की इच्छा ही कुछ थी। छोड़ गये मेरे बालम मुझे मझधार में अकेली अब तो बुढापे में मेरा सब कुछ मेरो ईश्वर ही है। जब तक जान है इस जगत में मेरा सिर्फ परमेश्वर ही सबकुछ है। जबतक साँसे चलेगी- प्रभुजीको याद और स्तुती करूँगी
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Reg ID: HF25-5373
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